क्या अगला नगर अध्यक्ष बदल पाएगा कछौना पतसेनी की तस्वीर



कछौना/हरदोई - हम बात कर रहे हैं जनपद हरदोई की नगर पंचायत कछौना पतसेनी की जोकि कई विकास कार्यों में अभी तक काफी फिसड्डी रहा है। 

जानकारी के मुताबिक आपको बता दें कि नगर पंचायत कछौना के सीमांत अभी तक कोई एमआरएफ सेंटर नहीं बना हुआ है। जिसकी वजह से सफाई व्यवस्था के बाद जो कूड़ा इक्कठा किया जाता है उसे नगर की सड़कों के किनारे  डंप किया जाता है। जिसकी कई बार शिकायत भी की गई। प्रथम चरण में पिछले समय की अधिशाषी अधिकारी महोदया रेणुका यादव से जब एमआरएफ सेंटर हेतु द इनसाइडर न्यूज़ के मुख्य संपादक विमलेश सिंह ने लिखित में जानकारी मांगी तो उन्होंने लिखित जवाब देते हुए यह बताया कि नगर से सटे ग्राम पंचायत लोनहारा में जमीन चयनित कर ली गई है। तहसीलदार संडीला को पैमाईश हेतु पत्र भी भेज दिया गया है। जिसका स्क्रीनशॉट आप यहां पर देख सकते है। यह जानकारी दिनांक 7.12.2021 की है।




दूसरे चरण में जब एमआरएफ सेंटर बनाने हेतु  इस लिखित जबाव के बाद भी कूड़ा सड़कों के किनारे डाला जाने लगा जिसकी सड़न और बदबू से राहगीरों का निकलना दुभर हो गया तो इसके बाबत तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी महोदया से बात को तो उन्होंने सड़कों के किनारे लगे कूड़े के ढेरों से तालाब पटवा दिए। जैसा कि आप सुधी पाठकों में से बहुत से लोग यह जानते है की तालाब को पाटने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कई बार भारत सरकार को फटकार भी लगाई है और इस पर बहुत ही स्ट्रिक्ट कानून भी है। क्योंकि लोग धीरे धीरे तालाबों को पाट देते है और फिर उस पर कब्जा कर लेते है। पुनः इसकी शिकायत तत्कालीन जिलाधिकारी महोदय से की गई तो उन्होंने उपजिलाधिकारी संडीला को इसकी जांच कर रिपोर्ट देने को कहा, लेकिन तहसीलदार महोदय ने लेखपाल को भिजवाकर रिपोर्ट तैयार करवा ली, जोकि बिलकुल गलत रिपोर्ट थी। जिसकी प्रतिलिप आप यहां देख सकते है। 




अभी मौजूद समय पर नगर का कोई अध्यक्ष नहीं है निकाय चुनाव के टल जाने से चुनाव काफी दूर चला गया और अध्यक्ष की कुर्सी खाली पड़ी है। नगर की जनता यह राह देख रही है कि कब हमें अगला नगर अध्यक्ष मिलेगा जो हमारी मांगे पूरी कर सके और नगर को खुशहाल व विकसित बना सके। 

नगर में मृत्यु शैय्या वाहन भी कई वर्षों से खराब पड़ा है। समय पड़ने पर कुछ न कुछ कमी निकल ही आती है जिसके चलते सिर्फ खड़ा ही रहता है। नगर के बहुत से मुद्दे ऐसे है जिन्हे नगरवासी चाहें तो चुटकियों में हल हो सकते है लेकिन नगर की जनता अपने मत का सही उपयोग करे और अपनी ताकत को पहचाने। 

यहां तक अगर आप अभी यह लेख पढ़ रहे है तो आपके मनमें एमआरएफ सेंटर का ख्याल जरूर आया होगा? तो चलिए जान लेते है एमआरएफ सेंटर के बारे में।

एमआरएफसेंटर में कई प्रकार की मशीन होती हैं। जिसके माध्यम से सूखे कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उपयोगी और गैर उपयोगी सामानों को अलग-अलग किया जाता है। अलग-अलग मशीनों से यह काम होता है। प्लांट को चलाने के लिए करीब 118.5 हार्स-पावर का मोटर होता है।

विमलेश सिंह "मोनू"
मुख्य संपादक एवं फाउंडर 
द इनसाइडर न्यूज़

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