सूर्य का बड़ा हिस्सा टूटा, विशाल बवंडर उठा, जानें Video देखकर क्यों चिंतित हैं वैज्ञानिक ?


खगोलविदों ने बताया है कि सूरज का एक बड़ा हिस्सा टूटा है। इसके चलते सौर ज्वाला का एक विशाल बवंडर उठा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी घटना कभी नहीं देखी।

सूर्य ने पिछले कुछ समय से धरती पर रहने वाले लोगों और खासकर खगोलविदों को बहुत ही चौंकाया है। पिछले साल तो लगातार सूर्य देवता से जुड़ी कुछ ना कुछ हैरान कर देने वाली जानकारियां सामने आती रहीं। अरबपति कारोबारी एलन मस्क के स्पेस प्रोजेक्ट को तो इसकी वजह से बहुत बड़ी वित्तीय परेशानी भी उठानी पड़ी थी। अब नासा के टेलीस्कोप ने जो कुछ देखा है, उसका वैज्ञानिकों को भी कभी अंदाजा नहीं था। सूरज की सतह से एक हिस्सा टूटता हुआ नजर आया है, जिसकी वजह से विशाल बवंडर उठा है और वहां भंवरनुमा आकृति बनती दिखाई पड़ी है। वैज्ञानिक सोलर फ्लेयर की घटनाओं से तो अच्छी तरह से वाकिफ हैं, लेकिन इस बार की घटनाक्रम ने उन्हें भी बड़ी चिंता में डाल दिया है।

सूर्य का बड़ा हिस्सा टूटा
सूरज ने हमेशा ही खगोलविदों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उसके प्रति, उसकी गतिविधियो के प्रति सदियों से खगलविद मोहित होते रहे हैं। लेकिन, सूर्य पर हुई एक नई घटना ने वैज्ञानिकों को अचंभे में डाल दिया है। दरअसल, सूरज के उत्तरी ध्रुव के पास इसका एक बड़ा हिस्सा इसकी सतह से टूट गया है और इसकी वजह से बवंडर की तरह विशाल भंवर की स्थिति पैदा हुई है। वैज्ञानिक सूर्य पर हुई इस घटनाक्रम का विश्लेषण करने में जुट चुक हैं, लेकिन जब से यह वीडियो उनके सामने आया है, खगोल की दुनिया से जुड़ा पूरा वैज्ञानिक समुदाय दंग है।

सूरज के उत्तरी ध्रुव पर उठा विशाल बवंडर
सूरज की सतह पर हुई इस हैरतअंगेज घटनाक्रम को नासा के जेम्स वेब टेलीस्कोप (NASA's James Webb telescope) ने कैद किया है और पिछले हफ्ते ही अंतरिक्ष के मौसम की भविष्यवाणी करने वाली डॉक्टर तमिता स्कोव ने अपने ट्विटर हैंडल पर इसे शेयर किया है। सूरज से सोलर फ्लेयर के उत्सर्जन या सौर विस्फोट से जुड़ी खबरें आए दिन आती रहती हैं, जिसकी वजह से पिछले पूरे साल धरती पर संचार प्रणाली कई बार प्रभावित हो चुकी है। इसलिए वैज्ञानिकों को यह चिंता सता रही है कि इस बार तो वहां सूरज का हिस्सा टूट ही गया है और उसकी वजह से भयानक बवंडर उठता नजर आया है।

वैज्ञानिक ने शेयर किया भंवर वाला वीडियो
डॉक्टर स्कोव ने वीडियो शेयर करते हुए पिछले हफ्ते ट्विटर पर लिखा है, 'ध्रुवीय भंवर के बारे में बात कीजिए! उत्तरी सौर ज्वाला से सामग्री अभी-अभी मुख्य फिलामेंट से टूटकर अलग हो गई है और अब हमारे तारे के उत्तरी ध्रुव के चारों ओर विशाल भंवर बनकर पसर रही है। यहां 55 डिग्री से ऊपर सूरज की ऐट्मोस्फेरिक डाइनैमिक्स को समझने के अनुमान को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया जा सकता है!'

96 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति-वैज्ञानिक
नासा के मुताबिक सौर ज्वाला सूर्य की सतह से फैल कर बाहर की ओर निकलने वाली एक विशाल चमकीली विशेषता है। अतीत में ऐसी कई घटनाएं दर्ज हैं, लेकिन इसने वैज्ञानिक समुदाय को दंग कर दिया है। डॉक्टर स्कोव ने एक ट्वीट में लिखा है,

 '#SolarPolarVortex के ज्यादा निरीक्षण से पता चलता है कि लगभग 60 डिग्री अक्षांश पर ध्रुव पर पूरी तरह से फैलने में पदार्थ को लगभग 8 घंटे लगे। इसका मतलब है कि इस घटना में क्षैतिज हवा की अनुमानित गति के हिसाब से ऊपरी सीमा 96 किलोमीटर प्रति सेकंड या 60 मील प्रति सेकंड है।

वैज्ञानिकों ने कहा कि ऐसा भंवर नहीं देखा!
यूनाइटेड स्टेस्ट्स नेशनल सेंटर फॉर ऐट्मोस्फेरिक रिसर्च के सोलर फिजिसिस्ट स्कॉट मैकिंटोश ने स्पेस डॉट कॉम से कहा है कि उन्होंने ऐसा 'भंवर' कभी नहीं देखा था, जो तब हुआ जब सौर ज्वाला का एक टुकड़ा टूटा और पूरे सौर वातावरण में पूरी तरह से फैल गया। मैकिंटोश दशकों से सूर्य की गतिविधियों को देख रहे हैं। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि अब जो सौर चक्र चल रहा है, उनमें इस तरह की गतिविधियों की आशंका हमेशा ही बनी रहती है। लेकिन, पहली बार इसने वैज्ञानिकों को भी परेशानी में डाल दिया है।

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