राजनीति - लोगों को ऐसा लग रहा था कि स्वामी प्रसाद मौर्य को अखिलेश यादव दंडित करेंगे क्योंकि स्वामी प्रसाद मौर्य ने श्रीरामचरित मानस का अपमान किया है लेकिन हुआ उल्टा, अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य को प्रमोशन देकर उनको समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त कर दिया है । शिवपाल और आजम भी पार्टी के महासचिव हैं लिहाजा अब समाजवादी पार्टी के अंदर अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य का कद अपने चाचा शिवपाल और पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम नेता आजम के बराबर कर दिया है।
इसके अलावा लखनऊ में OBC महासभा ने श्रीरामचरित मानस की चौपाइयां लिखकर कई पन्ने चौराहे पर जलाया और ये कहकर जलाया की वो रामचरित मानस की प्रतियों को जला रहे हैं । यानी बिहार के अशिक्षित शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने जो संक्रमण फैलाया था वो अब यूपी पहुंच चुका है और विधानसभा चुनाव हारने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए श्रीरामचरित मानस की मनमानी व्याख्या करके हिंदू धर्म को क्षति पहुंचाने का काम किया।
श्री रामचरित मानस की प्रतियां जलाने से पहले अखिलेश यादव ने एक बयान भी दिया है जिसमें उन्होंने योगी आदित्यनाथ से कहा है कि वो स्वयं एक महंत हैं इसलिए उनको वो चौपाइयां पढ़कर दिखानी चाहिए। अगर उनकी हिम्मत है तो उन चौपाइयों को पढ़कर दिखा दें यानी अखिलेश यादव, स्वामी प्रसाद मौर्य, ये सब श्रीरामचरित मानस के विरोध में एक साथ खड़े हो गए हैं और इन्होंने श्रीरामचरितमानस को ही 2024 के चुनाव में मुद्दा बनाने का फैसला भी कर लिया है।
दरअसल 1जनवरी 2024 को श्रीराम मंदिर का भव्य उद्घाटन होने जा रहा है। बीजेपी के लिए श्रीराम मंदिर सबसे बड़ा मुद्दा बनने वाला है और इसीलिए अखिलेश एंड कंपनी ने अब फैसला किया है कि श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों की मनमानी व्याख्या करके श्रीराम को अपमानित करके हिंदू धर्म को तोड़कर वोट बटोरने का काम किया जाए।
रिपोर्ट - अजीत मिश्रा शाहजहांपुर

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