संविधान के आर्टिकल 153 के मुताबिक, 'प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा।' 1956 में संविधान में संशोधन करके यह व्यवस्था बनाई गई कि एक ही व्यक्ति को दो या दो से ज्यादा राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है। संविधान के आर्टिकल 155 के अनुसार, 'गवर्नर की नियुक्ति राष्ट्रपति वारंट जारी करके अपने हस्ताक्षर और मुहर द्वारा करेगा।' वहीं, आर्टिकल 156 कहता है कि 'गवर्नर राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहेगा।' लेकिन, राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल 5 वर्षों का होगा। यदि राष्ट्रपति 5 साल से पहले ही चाहता है तो राज्यपाल को अपना पद छोड़ना पड़ता है। लेकिन, क्योंकि राष्ट्रपति केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से कार्य करता है, इसलिए राज्यपालों की नियुक्ति, उसे हटाने या फिर ट्रांसफर का कार्य प्रभावी तौर पर केंद्र सरकार ही करती है
6 राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति राज्यपाल का पद एक बार फिर से सुर्खियों में इसलिए आया है कि रविवार को यानि 12 फरवरी, 2023 को केंद्र सरकार द्वारा 12 राज्यों में नए राज्यपालों को नियुक्त की गई है। इनमें से कुछ नए नाम हैं, जबकि कुछ को एक राजभवन से दूसरे राजभवन में ट्रांसफर किया गया है। इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को भी नए उपराज्यपाल मिले हैं। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) केटी परनायक को अरुणाचल प्रदेश, लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को सिक्किम, सीपी राधाकृष्णन को झारखंड, शिव प्रताप शुक्ला को हिमाचल प्रदेश, गुलाब चंद कटारिया को असम और जस्टिस (रिटायर्ड) एस अब्दुल नजीर को आंध्र प्रदेश का नया गवर्नर नियुक्त किया है राज्यपालके लिए योग्यता क्या है ? संविधान के आर्टिकल 157 और 158 में राज्यपाल की योग्यता और शर्तों के बारे में बताया गया है। इसके तहत गवर्नर को भारत का नागरिक होना चाहिए और कम से कम 35 साल की आयु होनी आवश्यक है। ना ही वह दिवालिया हो या ना ही मानसिक तौर पर बीमार व्यक्ति हो। राज्यपाल को संसद या प्रदेश विधायिका के किसी सदन का भी सदस्य नहीं होना चाहिए और ना ही उसे लाभ के किसी पद पर होना चाहिए।



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