श्रद्धांजलि सभा के माध्यम से मृत्युभोज/तेरही का बहिष्कार

 



चन्दौली- संविधान रचयिता बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने भारत के लोगों को संविधान व बौद्ध धर्म देकर बहुजन समाज के लोगों को बाह्याडम्बर व कुरूतियों से दूर रहने की सीख दिये। जिसका परिणाम शिक्षा के बदौलत लोगों की बदली मानसिकता से देखने मिल रहा है। जो कि 21वीं सदी में एक क्रांतिकारी कार्य है। इसी दिशा में चन्दौली जिले के एक गाँव में विगत 1 फरवरी को परिनिबुत्त (निर्वाण प्राप्त) श्रद्धेया सुनीता जी, सहायक अध्यापिका, कम्पोजिट विद्यालय नोनार, सकलडीहा चन्दौली, निवासी सिरकलपुर, धीना, चन्दौली को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए 18 फरवरी को सिरकलपुर गांव में श्रद्धांजलि सभा व परित्राण पाठ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भन्ते करूणाधर द्वारा सम्पन्न कराया गया। 



कार्यक्रम आयोजक श्रद्धेय सूर्यनाथ ने  मृत्युभोज/तेरही का बहिष्कार करते हुए सिर्फ श्रद्धांजलि सभा का ही कार्यक्रम कराकर सराहनीय और अनुकरणीय कार्य किये और समाज के लोगों को मनुवादी कुरूतियों को न मानने का एक सकारात्मक संदेश दिये।  सूर्यनाथ जैसे बहुजन समाज के पुरूष वर्तमान पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का कार्य किये हैं। अबाजका(ABAJKA) टीम चन्दौली विशेष तौर पर विनोद कुमार, वरि.उपाध्यक्ष ABAJKA चन्दौली व सुनील, धर्मेंद्र कुमार, अरविंद कुमार व BBS-3 टीम सिरकलपुर बहुत ही बधाई के पात्र हैं।

        कार्यक्रम में मृत्युभोज/तेरही जैसी सामाजिक कुरीति और समाज में व्याप्त अन्धविश्वास और पाखंड को दूर करने तथा शिक्षा को अपनाकर धार्मिक सामाजिक, राजनीतिक, व आर्थिक उन्नति करने पर वक्ताओं द्वारा महापुरूषों के विचार प्रस्तुत किये गए। कार्यक्रम में महेंद्र कुमार, जिलाध्यक्ष ABAJKA चन्दौली के सानिध्य में रवि कुमार, बंशराज, श्याम कार्तिक, शिवकुमार, गिरीश चंद्र सर, अशोक, विरेन्द्र कुमार, उमेश चक्रवर्ती, विनीत जैसवार,   अजय कुमार भारती बेसिक शिक्षक संगठन बेटवा के अरूण रत्नाकर, निठोहर सत्यार्थी, ज्ञानचंद कान्त के साथ ही भाई राम प्रधान आदि बहुत से साथियों के साथ- साथ ग्राम सभा सिरकलपुर की जनता भारी संख्या में उपस्थित रही। मृत्युभोज/तेरही जैसी कुप्रथा को  समाप्त करने में योगदान देने वाले और उसके साक्षी बनने वाले सभी महिला व पुरूष को शुभकामनाएं दी गई। 

रिपोर्ट - रतनेश यादव चंदौली 


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