अगाध श्रद्धा का केंद्र है लिलौटी नाथ मंदिर





शिवरात्री स्पेशल रिपोर्ट - नागेन्द्र प्रताप शुक्ल

शहर के निकट स्थित पौराणिक लिलौटी नाथ शिव मंदिर श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा का केंद्र है। मान्यता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय भगवान कृष्ण के मार्गदर्शन में यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। लोगों के मुताबिक मंदिर के कपाट खुलने से पहले आज भी शिवलिंग पूजित मिलता है। किवदंती है कि भोर होने से पहले अश्वत्थामा यहां शिव को जलाभिषेक करने आते हैं। वहीं कुछ लोग आल्हा-ऊदल द्वारा पूजा किए जाने की बात बताते हैं। इस मंदिर का जीर्णोद्धार महेवा स्टेट के लोगों ने कराया। यहां श्रावण मास में मेला लगा रहता है।


शिवलिंग का बदलता है रंग

जुनई और कंडवा नदी के उद्गम स्थल के बीच स्थित पौराणिक महत्व वाले लिलौटीनाथ धाम में शिवलिंग पर आकृति बनी है। इसमें लोग मां पार्वती के स्वरूप को देखते हैं। खास यह है कि शिवलिंग दिन मे कई बार रंग बदलता है। मान्यता है कि सुबह के समय काला, दोपहर में भूरा और रात के समय हल्की सफेदी शिवलिंग को विशेष बनाती है।

हर अमावस्या को लगता है मेला
कभी बबुरी वन के नाम से विख्यात रहे इस स्थल पर मुंडन, जनेऊ और तिलक जैसे संस्कारों के लिए श्रद्धालु अक्सर यहां का रुख करते हैं। रामचरितमानस का पाठ भी होता है। अमावस्या के दिन संगम में डुबकी लगाकर श्रद्धालु अपने को धन्य मानते हैं। श्रद्धालुओं के आवागमन से इस दिन यहां मेला लगता है।




लिलौटी धाम को पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग
पौराणिक महत्व के चलते लिलौटी नाथ शिवधाम में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ती है। अगाध श्रद्धा का केंद्र होने के चलते श्रद्धालु इसे पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग करते आए हैं। महंत मोहन गिरि के मुताबिक हाल ही में जीर्णोद्धार के लिए जिले के एक पूर्व सांसद ने पहल भी की थी पर वह पहल भी सर्वे तक सीमित रही। महंत इसे पर्यटन स्थल के रूप में घोषित करने की मांग करते रहे है। 


 

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