रायबरेली - मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षा व्यवस्था के लिए तरह तरह की योजनाएं को लेकर भले अरबों रुपए खर्च कर रहे हो मगर जिले में बैठे जिम्मेदार इस पर ध्यान देने की कोशिश भी नहीं कर रहे हैं। ताजा मामला दीनशाह गौरा ब्लॉक के बहीखोर गांव स्थित स्कूल का है। यहां ईंट ढोते बच्चों का वीडियो वायरल होने से विभाग में हड़कम्प मच गया है।
बच्चों से दोपहर तक ईंट ढोने का काम कराया जाता है। इसीलिए सरकारी नौकरी करने वाले टीचर अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में नहीं पढ़ाते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्कूल आने वाले बच्चे कॉपी किताब से दूर ईंट ढोते नजर आ रहे है। यह वीडियो में कैमरे में कैद होने के बाद वायरल होने पर शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया और इस पर राजनीति शुरू हो गई है।
इस वीडियो को देखते ही समाजवादी पार्टी ने भी अपने टि्वटर हैंडल पर ट्वीट किया और लिखा की बच्चों को बाल शिक्षा के बजाय बाल मजदूरी करवाई जा रही है। ये है योगी शासित यूपी BJP सरकार में बच्चों को किताब, कलम, लैपटॉप, टैबलेट, शिक्षा, पोषणयुक्त मिड डे मील के बजाय बच्चों से झाडू, पोंछा, टॉयलेट सफाई, बर्तन मंजवाना और ईंट ढुलवाना जैसे कार्य कराए जाते हैं। वायरल वीडियो दीनशाह गौरा ब्लाक के बही खोर गांव के प्राथमिक विद्यालय का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार बच्चों से सुबह विद्यालय के समय से दोपहर तक ईंट ढोने का काम करवाया जाता हैं।
बीएसए ने कहा होगी जांच
इससे यहीं से अंदाजा लगाया जा सकता कि जब विद्यालय के गुरु जी बच्चों से यह कार्य कराएंगे तो उन्हें शिक्षा कब देंगे। वीडियो वायरल होने के बाद जहां शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं बच्चों के अभिभावकों ने भी शिक्षकों के खिलाफ गहरी नाराजगी जताई है। इस सम्बन्ध में बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसकी जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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